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2017/5/1731-05-2017
पंजाब मेल ने गौरवशाली 105 वर्ष पूर्ण किए

पंजाब मेल ने गौरवशाली 105 वर्ष पूर्ण किए

      हालांकि बाम्‍बे से पेशावर तक चलने वाली पंजाब मेल कब प्रारंभ हुई यह स्‍पष्‍ट नहीं है, लेकिन 1911 के लागत अनुमान कागजात एवं 12 अक्‍टूबर 1912 को दिल्ली स्‍टेशन पर पंजाब मेल के कुछ मिनट देरी से पहुंचने पर एक क्षुब्‍ध यात्री द्वारा की गई शिकायत के आधार पर यह कहा जा सकता है कि पंजाब मेल ने अपनी पहली यात्रा बेलार्ड पियर मोल स्‍टेशन से 01 जून 1912 को प्रारंभ की।

      पंजाब मेल, प्रसिध्‍द फ्रंटियर मेल से 16 साल पुरानी है।  बेलार्ड पियर मोल स्‍टेशन जीआईपी रेल की सेवाओं का एक स्‍टेशन था।  पंजाब मेल को उस समय पंजाब लिमिटेड कहा जाता था, जो 1 जून 1913 को भाप के इंजन से प्रारंभ की गई।

      प्रारंभ मे पी एंड ओ स्‍टीमर्स पर पंजाब मेल को लाया गया।  जिसके साथ औपनिवेशिक भारत में प्रथम नियुक्ति पर आने वाले ब्रिटिश राज्‍य के अधिकारी अपनी पत्नियों के साथ उपस्थित थे, क्‍योंकि ब्रिटिश अधिकारियों के पास मुंबई तक की समुद्र यात्रा तथा साथ ही मुंबई में उतरने के बाद अपनी तैनाती के स्‍थल तक रेल से जाने के लिए अंतर्देशीय यात्रा के टिकट मौजूद थे।  मुंबई में उतरने के बाद वे मद्रास, कलकत्‍ता या दिल्‍ली कहीं भी अपनी तैनाती स्‍थल पर जा सकते थे।

      उस समय की गाडियों में पंजाब मेल या पंजाब लिमिटेड एक प्रतिष्ठित गाडी थी।  पंजाब लिमिटेड मुंबई के बेलार्ड पियर मोल स्‍टेशन से जीआईपी रूट के माध्‍यम से निश्चित डाक दिनों पर सीधे पेशावर तक जाती थी तथा लगभग 47 घंटों में 2496 किमी की दूरी तय करती थी।

      इस गाडी में 6 डिब्‍बे थे।  तीन यात्रियों के लिए तथा 3 दिन डाक के सामान या चिट्ठियों के लिए।  इन सवारी डिब्‍बों की क्षमता केवल 96 यात्रियों की थी।  इन शानदार शयनयानों में सभी गलियारों वाले शयनयानां को, जिन्‍हे प्रथम श्रेणी के रूप में बनाया गया था, जिसमें प्रत्‍येक कंपार्टमेंट में 2 शायिकाएं थीं।  चूंकि यह उच्‍च श्रेणी के यात्रियों के लिए थे इसलिए इसमें सुसज्जित खान-पान की व्‍यवस्‍था, शौचालय, प्रसाधन, स्‍नानगृह तथा रेस्‍टोरेंट के अलावा गोरे साहबों के सामान तथा नौकरों के लिए एक कंपार्टमेंट भी था।

      विभाजन के पूर्व की अवधि में पंजाब लिमिटेड ब्रिटिश भारत की सबसे तेज रफ्तार गाडी थी।  पंजाब लिमिटेड के मार्ग का बडा हिस्‍सा जीआईपी रेल पथ पर से इटारसी, आगरा, दिल्‍ली, अमृतसर तथा लाहौर से गुजरता था तथा पेशावर छावनी में समाप्‍त हो जाता था।

      इस गाडी ने 1914 से बंबई वीटी (अब छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई) से प्रस्‍थान करना एवं पहुंचना प्रारंभ किया।  बाद में इसे पंजाब लिमिटेड के स्‍थान पर पंजाब मेल कहा जाने लगा और इसकी सेवाएं दैनिक कर दी गई।

      प्रारंभ में इसकी सेवाएं उच्‍च श्रेणी के गोरे साहबों के लिए थी, लेकिन बाद में इसमें निम्‍न श्रेणी को भी प्रवेश दिया जाने लगा।  1930 के मध्‍य में पंजाब मेल में तृतीय श्रेणी का डिब्‍बा लगाया गया।

      1914 में बांबे से दिल्‍ली का जीआईपी रूट 1,541 किमी था इसमें यह गाडी 29 घंटा 30 मिनट में पूरा करती थी।  1920 के प्रारंभ में 18 मध्‍यवर्ती स्‍टेशनों पर रूकने के बाद भी इसके समय को घटाकर 27 घंटा 10 मिनट किया गया।

      1972 में गाडी फिर से 29 घंटे लेने लगी।  सन् 2011 में पंजाब मेल 55 मध्‍यवर्ती स्‍टेशनों पर रूकने लगी।  1945 में पंजाब मेल में वातानुकूलित शयनयान लगाया गया।

      थल घाट के विद्युतीकरण के पश्‍चात इस गाडी को बंबई वीटी से मनमाड तक विद्युत इंजन द्वारा चलाया जाता था।  मनमाड से डब्‍ल्‍यू पी श्रेणी के भाप इंजन द्वारा यह गाडी सीधे फिरोजपुर तक जाती थी।

      1968 में इस गाडी को डीजल इंजन से झॉंसी तक चलाया जाने लगा तथा इसके डिब्‍बों की संख्‍या 12 से 15 कर दी गई।  बाद में डीजल इंजन नई दिल्‍ली तक चलने लगा और 1976 में यह फिरोजपुर तक जाने लगा।

      डिब्‍बों की संख्‍या बढाकर 18 कर दी गई, दो डिब्‍बे झॉंसी से लगाए जाने लगे।  1970के अंत या 1980 के प्रारंभ में पंजाब मेल भुसावल तक विद्युत कर्षण पर डब्‍ल्‍यू सीएम/1 ड्यूल करंट इंजन द्वारा चलाई जाने लगी।  जिसमें इगतपुरी में डीसी से एसी कर्षण बदलता था।

      पंजाब मेल मुंबई से फिरोजपुर छावनी तक की 1930 किमी तक की दूरी 34 घंटों में पूरी करती है।  अब इसमें रेस्‍टोरेंट कार के स्‍थान पर पेंट्रीकार लगाई जाती है।  वर्तमान में इसमें एक वातानुकूलित प्रथम श्रेणी सह वातानुकूलित द्वितीय श्रेणीशयनयान, एक वातानु‍कूलित द्वितीय श्रेणी शयनयान, 5 वातानुकूलित तृतीय श्रेणी शयनयान, 10 शयनयान, एक भोजनयान, तीन सामान्‍य द्वितीय श्रेणी के डिब्‍बे तथा 2 सामान्‍य द्वितीय श्रेणी के डिब्‍बे सह गार्ड ब्रेकयान है।

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(V. Chandrasekar)
PRO-HQ




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