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2019/11/612-11-2019
मध्य रेल के मुंबई-कल्याण खंड के विद्युतीकरण के 91 वर्ष पूरे।

मध्य रेल

प्रेस विज्ञप्ति

 

मध्य रेल के मुंबई-कल्याण खंड के विद्युतीकरण के91 वर्ष पूरे।

 

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (तत्कालीन विक्टोरिया टर्मिनस से कल्याण के लिए रेलवे विद्युतीकरणदिनांक 12.11.1928 को 1500 वोल्ट डीसी ट्रैक्शन सिस्टम के साथ शुरू किया गया था। विद्युतीकरण को बाद में नार्थ ईस्ट लाइन में इगतपुरी तक और साउथ ईस्ट लाइन में पुणे तक बढ़ाया गया। पहली यात्री ट्रेन, डेक्कन क्वीन, इलेक्ट्रिक लोको WCP-1 के साथ दिनांक 1.6.1930को बॉम्बे वीटी (अब CSMT) और पूना (अब पुणे) के बीच चली।

 

पृष्ठभूमि:

1500-वोल्ट डीसी सिस्टम पर ओवर हैड इक्विपमेंट पावर को 1500 वोल्ट पर रेक्टिफायर फेड ट्रैक्शन सबस्टेशन (TSS)) से सप्लाई किया जा रहा था। यानी TSS समानांतर में जुड़े हुए थे। ट्रैक्शन सब स्टेशन अंतर कम होने, अंतर स्तर को असहनीय और अन्य समस्याओं का कारण था। ओवर हेड डीसी ट्रैक्शन पॉवर सप्लाई सिस्टम अपनी चरम सीमा तक पहुँच गया था और सेक्शन में अधिक ट्रेनों को चलाना बहुत मुश्किल था। डीसी कर्षण प्रणाली के रखरखाव की लागत भी बहुत अधिक थी। डीसी प्रणाली में बहुत अधिक समस्या के कारण फाल्ट बढते गए।

 

25 केवी एसी प्रणाली यूरोप में, विशेष रूप से फ्रांसीसी रेलवे (एसएनसीएफ) पर अनुसंधान और परीक्षणों के परिणामस्वरूप विद्युतीकरण के एक किफायती प्रणाली रूप के रूप में सामने आयी। भारतीय रेलवे ने विद्युतीकरण के 25 केवी एसी प्रणाली को 1957 में एक मानक के रूप में अपनाने का फैसला किया।

 

मौजूदा डीसी ट्रैक्शन सिस्टम की लिमिटेशन को ध्यान में रखते हुए, इसे 1996-97 में 25 केवी एसी कर्षण में बदलने का निर्णय लिया गया था।दिनांक 12.11.2006 को इगतपुरी-कल्याण खंड का डीसी से एसी ट्रैक्शन में रूपांतरणऔर दिनांक 24.10.2010 को कल्याण - पुणे-लोनावाला खंड के रूपांतरण का काम पूरा हुआ। मध्य रेल के कल्याण-ठाणे खंड काडीसी से एसी ट्रैक्शन में रूपांतरण का काम दिनांक 24.1.2014 को और ठाणे-सीएसएमटी खंड का दिनांक 8.6.2015 को पूरा हुआ। इसके साथ, मध्य रेल के संपूर्ण मेन लाइन रेल नेटवर्क में 25 केवी एसीट्रैक्सन का उपयोग हो रहा है।

 

जमा पूंजी:

1500 वी डीसी ट्रैक्शन से 25 केवी एसी ट्रैक्शन में स्विच करने के कारण, कल्याण-सीएसएमटी में ट्रैक्शन सब स्टेशन की संख्या 21 से घटकर 4 और सीएसएमटी-इगतपुरी / पुणे सेक्शन में 72 से 18 हो गई है।

 

डीसी से एसी में रूपांतरण के कारण बिजली बिल में प्रति वर्ष लगभग रु 120 करोड़ की बचत होती है क्योंकि ट्रांसमिशन हानियाँ कम हो गई हैं, थ्री फेज ईएमयू और इंजनों में रिजनरेटिव ब्रेकिंग शुरू की गई है।

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दिनांक: 12 नवंबर 2019

यह विज्ञप्ति जनसंपर्क विभाग, मध्य रेल, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस मुंबई द्वारा जारी कीया गया है



(Shivaji Sutar)
Chief Public Relations Officer




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