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परेल

यांत्रिक विभाग - परेल कारख़ाना

वर्ष 1879 में ग्रेट इंडियन पेनिनसुलर रेल्वे द्वारा स्टीम लोको शेड के रूप में सेंट्रल रेल्वे लोकोमोटिव वर्कशॉप का गठन किया गया था॰  बाद स्टीम लोको की मरम्मत एवं ओवरहौलिंग का कार्य शुरू किया गया, जो वर्ष 1962-63 में प्रतिमाह 32 स्टीम लोको की ऊंचाई तक छू गया॰ स्टीम कर्षण में कमी आने के बाद, शॉप ने 1974-75 से डीजल लोको की मरम्मत एवं ओवरहौलिंग कार्य शुरू किया॰

 

यह भारतीय रेल के सबसे बड़े तथा पुराने कारखानों में से एक है जहां विविध मरम्मत/निर्मिती कार्य होते आए हैं॰ मुंबई के बीचों बीच स्तिथ इस कारखाने तक सड़क, समुन्द्र एवं हवाई मार्ग से सहजता से पहुंचा जा सकता है॰ इस कारखाने को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सशस्त्र बलों को सेवाए प्रदान करने का अनोखा गौरव भी प्राप्त है॰

 

परेल कारख़ाना धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए इन दिनों डीजल लोकोमोटिव व डीजल क्रेन की मरम्मत व ओवरहौलिंग के साथ-साथ मेन लाइन कोचेस के रिहैबिलिटेशन का काम भी कर रहा है॰ यह कारख़ाना डीजल लोको, कैरीज़ एवं वैगनों के कई कलपुर्ज़े भी बनाता है॰

 

यह कारख़ाना नेरल-माथेरान सेक्शन तथा कालका-शिमला सेक्शन के लिए नैरो-गैज लोको का सफलता पूर्वक निर्माण भी कर चुका है॰

     यह डीएलडबल्यू व सीएलडबल्यू के अलावा डीजल लोकोमोटिव बनाने वाला एकमात्र कारख़ाना है॰

संक्षिप्त इतिहास

1879

- स्टीम लोको एवं शेड के रूप मे स्थापना॰

1974

- डीजल लोकोमोटिव्स की मरम्मत॰

1997

- दुर्घटना राहत के दौरान प्रयुक्त 140 टन क्रेन की मरम्मत॰

2002

- आईएसओ-9001:2000, वर्ष 2010 में 2008 आवृति के लिए॰

2005

- नैरो गेज लोको का निर्माण॰

2006

- ब्रॉड गेज डीजल लोकोमोटिव अंडरफ़्रेम का निर्माण॰

2007

- ब्रॉड गेज डीजल लोकोमोटिव का निर्माण॰

2007

- सवारी डिब्बों का मिडलाइफ़ रिहैबिलिटेशन॰

2009

- सवारी डिब्बा बोगी की मरम्मत॰

2010

- माल डिब्बा पहियों की आपूर्ति॰

2010

- 100 वें ब्रॉड गेज डीजल लोकोमोटिव का निर्माण॰

2010  - भारतीय रेल के लिए माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित प्रथम ब्रॉड गेज शंटिंग
        लोकोमोटिव का निर्माण॰
    2010

- म रे डिविजनों के लिए ट्रेक सफाई मशीन का निर्माण॰

प्रमुख गतिविधियां

ब्रॉड गेज डीजल लोको की मरम्मत एवं निर्माण

नैरो गेज डीजल लोको की मरम्मत एवं निर्माण

सवारी डिब्बों का रिहाब्लिटेशन, डिब्बे ले जाने के लिए कोच-परिवर्तन, दुर्घटना राहत गाड़ियों हेतु कोच परिवर्तन

भारतीय रेल के दुर्घटना स्थलों पर प्रयुक्त 140 टन क्रेन की मरम्मत

बुनियादी संरचना

वैशिष्ट

समग्र क्षेत्र

1.90 लाख वर्ग मीटर (47 एकड़ )

आच्छदित क्षेत्र

81,250 वर्ग मीटर

विद्युत भार

13,380 किलोवाट

औसत विद्युत ऊर्जा खपत

5.65 लाख किलोवाट घंटे प्रति माह

यंत्र तथा संयंत्र

518

बजट

`225.60 करोड़

रेलवे आवास

676

कर्मचारी

5285

अधिकारी

22

आईएसओ 9001: 2000

2002




Source : CMS Team Last Reviewed on: 24-10-2011  


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